UPSC SYLLABUS IN HINDI PDF

UPSC SYLLABUS IN HINDI PDF

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अगर आप UPSC सिलेबस को हिंदी में पीडीएफ फॉर्मेट में ढूंढ रहे हैं, तो आप वाकई सही वेबसाइट पर हैं। इस वेब ब्लॉग पोस्ट में मैं आपके लिए उस सिलेबस के डाउनलोड लिंक को प्रस्तुत कर रहा हूं, जिसके द्वारा आप उसे आसानी से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

Table of Contents

UPSC SYLLABUS

UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा देने से पहले, इसके सिलेबस के बारे में जानकारी प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, कुछ छात्र या उम्मीदवार सिलेबस को समझे बिना दूसरों की सलाह पर आकर कोचिंग संस्थानों में शामिल हो जाते हैं और महंगी किताबें और नोट्स खरीद लेते हैं। इससे न केवल उनका पैसा बर्बाद होता है, बल्कि उनका समय भी बर्बाद होता है। क्योंकि उन्होंने सिलेबस को समझा नहीं और किसी दूसरे की बातों में आकार तैयारी करना शुरू कर दिया।

ऐसी गलतियों से बचने के लिए, मैं आपको “upsc syllabus in hindi pdf” में प्रदान कर रहा हूं। इसे पढ़कर, आप यदि किसी भी प्रकार की UPSC परीक्षा देते हैं, तो आपके पास उच्च अंक हासिल करने का मौका होगा, साथ ही आपको सिलेबस के बारे में भी विस्तृत जानकारी मिलेगी। पहले सिलेबस को समझें, फिर ही किताबें खरीदें और कोचिंग संस्थानों में शामिल हों। ऐसा करके ही आपको UPSC की तैयारी में फायदा होगा। यह पीडीएफ आपको पूरी तरह से हिंदी में प्रदान की जा रही है, जिसमें सिलेबस की पूरी सारी जानकारी होगी, और आप इसे पढ़कर आसानी से UPSC परीक्षा को पास कर सकेंगे।

UPSC EXAM PATTERN

यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा एक महत्वपूर्ण परीक्षा है जो भारतीय सरकार के विभागों में सिविल सेवा के लिए चयन करती है। यह परीक्षा विभिन्न चरणों में आयोजित होती है, जिनका उद्देश्य उम्मीदवारों की विशेष क्षमताओं और ज्ञान की माप करना होता है। इस परीक्षा पैटर्न में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, और साक्षात्कार शामिल होते हैं, जिनके माध्यम से योग्य और ज्ञानी उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। इस पैटर्न के माध्यम से यूपीएससी परीक्षा एक सशक्त और योग्य सिविल सेवा कैडर को तैयार करने का संदेश देती है।

यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है – प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। नीचे दिए गए हैं यूपीएससी परीक्षा के प्रत्येक चरण की विस्तृत जानकारी:

1. प्रारंभिक परीक्षा:

  • प्रकार: यह परीक्षा एक चरण में आयोजित होती है और यह एक मैक्सिमम 400 अंकों की होती है।
  • पेपर: प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर्स होते हैं – सामान्य अध्ययन I और सामान्य अध्ययन II।
  • प्रकार: प्रश्न पेपर I में वस्तुनिष्ठ प्रकार के होते हैं और पेपर II में यह वस्तुनिष्ठ और योग्यता परीक्षण होता है।
  • भाषा: पेपर I और II दोनों ही पेपर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होते हैं।
  • अंकन: हर सही उत्तर के लिए 2 अंक दिए जाते हैं, और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.66 अंक की कटौती होती है।

2. मुख्य परीक्षा:

  • प्रकार: मुख्य परीक्षा भाषण, निबंध और सामान्य अध्ययन के पेपरों में विभाजित होती है और यह एक मैक्सिमम 1750 अंकों की होती है।
  • भाषा: मुख्य परीक्षा के पेपर आपकी भाषा कौशलता को मान्यता देते हैं, और आप उनमें हिंदी या अंग्रेजी भाषा में चुन सकते हैं।

3. साक्षात्कार:

  • प्रकार: साक्षात्कार एक व्यक्तिगत इंटरव्यू होता है जिसमें आपके ज्ञान, व्यक्तिगतता, सामाजिक जागरूकता और व्यक्तिगत क्षमताओं की जाँच की जाती है।
  • मानक: साक्षात्कार का मानक 275 अंकों का होता है।
  • इस रूपरेखा के अनुसार, यूपीएससी परीक्षा का पैटर्न विभिन्न चरणों में विभाजित होता है, जो आपकी तैयारी को संरचित और विश्वसनीय बनाता है।
परीक्षा चरण पेपर अवधि अधिकतम अंक
प्रारंभिक परीक्षा पेपर I 2 घंटे 200
पेपर II 2 घंटे 200
मुख्य परीक्षा निबंध 3 घंटे 250
सामान्य अध्ययन I 3 घंटे 250
सामान्य अध्ययन II 3 घंटे 250
सामान्य अध्ययन III 3 घंटे 250
सामान्य अध्ययन IV 3 घंटे 250
वैकल्पिक पेपर I (पेपर VI) 3 घंटे 250
वैकल्पिक पेपर II (पेपर VII) 3 घंटे 250
साक्षात्कार 275

ध्यान दें कि मुख्य परीक्षा में विशेष विषयों के अलावा एक निबंध और चार सामान्य अध्ययन पेपर होते हैं, साथ ही दो वैकल्पिक पेपर भी होते हैं। उपरोक्त जानकारी के आधार पर, यूपीएससी परीक्षा प्रक्रिया के लिए अधिकतम अंक 2025 होते हैं, जिसमें मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल होते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन एक स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य केवल क्वालीफाइंग प्रकृति का होता है। प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम चयन में शामिल नहीं किया जाता है।

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UPSC AGE LIMIT

आयु सीमा:

सिविल सेवा परीक्षा के लिए आयु सीमा उम्मीदवारों के वर्गों के आधार पर विभिन्न होती है। यहां, हम कुछ महत्वपूर्ण आयु सीमाओं की जानकारी प्रदान कर रहे हैं:

  • जातिगत आरक्षित श्रेणियां (SC/ST): जातिगत आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा तक की आयु सीमा 37 वर्ष होती है।
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (OBC): अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा तक की आयु सीमा 35 वर्ष होती है।
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (EWS): आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा तक की आयु सीमा भी 35 वर्ष होती है।
  • अन्य पिछड़े वर्ग (Non-Creamy Layer): अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा तक की आयु सीमा 32 वर्ष होती है।
  • अन्य उम्मीदवार (General): आम श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए मुख्य परीक्षा तक की आयु सीमा 32 वर्ष होती है।

विशेष प्राधिकृत श्रेणी:

कुछ विशेष प्राधिकृत श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में छूट दी जाती है। इसके लिए अधिक जानकारी UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

नोट: ऊपर दी गई आयु सीमाएं सिविल सेवा परीक्षा 2021 के आधार पर हैं और ये बदल सकती हैं। उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना की जाँच करनी चाहिए।

UPSC PRELIMS SYLLABUS

1. प्रारंभिक परीक्षा:

पेपर I

  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं ।
  • भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन।
  • भारत एवं विश्व भूगोल – भारत एवं विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल।
  • भारतीय राजतंत्र और शासन – संविधान, राजनीतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोक नीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे आदि ।
  • आर्थिक और सामाजिक विकास – सतत विकास, गरीबी, समावेश, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि।
  • पर्यावरण परिस्थितिकी जैव-विविधता और मौसम परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे, जिनके लिए विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है।
  • सामान्य विज्ञान ।

पेपर II

  • बोधगम्यता
  • संचार कौशल सहित अंतर – व्यक्तिक कौशल तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता
  • निर्णय लेना और समस्या समाधान
  • सामान्य मानसिक योग्यता
  • आधारभूत संख्यनन (संखयाएं और उनके संबंध, विस्तार क्रम आदि, दसवीं कक्षा का स्तर)
  • आंकड़ों का निर्वाचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका, आंकड़ों की पर्याप्तता आदि, दसवीं कक्षा का स्तर)

UPSC MAINS SYLLABUS

GS PAPER I

1. भारतीय संस्कृति और विरासत

  • प्राचीनता के साक्षात्कार
  • भारतीय कला के विभिन्न प्राचीन शैलियाँ
  • भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा
  • भारतीय लोककला और शिल्पकला
  • भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार

2. भारतीय इतिहास – प्राचीन और मध्यकालीन

  • इंदस्ट्रीयल सभ्यता की उत्थान
  • वैदिक संस्कृति और वर्ण व्यवस्था
  • मौर्य और गुप्त साम्राज्य
  • महाजनपद और मगध साम्राज्य
  • गुप्त साम्राज्य के कला और साहित्य

3. भारतीय इतिहास – मध्यकालीन और मुघल साम्राज्य

  • दिल्ली सल्तनत का उदय और विकास
  • मुघल साम्राज्य का आरंभ और विकास
  • मुघल साम्राज्य की कला, संस्कृति, और साहित्य
  • मुघल साम्राज्य की समाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ

4. भारतीय इतिहास – मोदर्न पीरियड

  • ब्रिटिश साम्राज्य का आगमन और उसका प्रभाव
  • 1857 की क्रांति और उसके परिणाम
  • स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका और आंदोलन
  • स्वतंत्रता संग्राम के नेता और महत्वपूर्ण घटनाएं

5. विश्व इतिहास

  • प्राचीन यूरोपीय सम्राटियाँ और साम्राज्य
  • यूरोप में नैतिकता और विज्ञान की प्रगति
  • इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन और उसके प्रभाव
  • विश्व युद्धों की प्रमुख घटनाएं और संघर्ष

6. विश्व भूगोल

  • भू-विज्ञानीय प्रमुखताएँ
  • महाद्वीपों की जलवायु और भूगोलिक संरचना
  • जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव
  • प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और प्रबंधन

7. भारतीय समाज और सांस्कृतिक विषय

  • सामाजिक संरचना और वर्ण व्यवस्था
  • जाति और जाति व्यवस्था के असर
  • जातिवाद और सामाजिक सुधार
  • समाज में महिलाओं की भूमिका और समस्याएं

8. विविधता और समाज

  • भारतीय भाषाएँ, लोक नृत्य, और संस्कृति
  • धर्मीय और सांस्कृतिक विविधता का प्रभाव
  • नृत्य, संगीत, और कला की विविधता
  • संगठनिक संघर्ष और समाज में सामाजिक बदलाव

GS PAPER II

1.संविधानिक प्रक्रिया

  • संविधान की विशेषता और मुख्य विशेषताएँ
  • संविधान सभा के गठन और कार्य
  • संविधान संशोधन प्रक्रिया
  • संविधान के मौलिक अधिकार और कर्तव्य

2. सामाजिक और सांस्कृतिक सामर्थ्य

  • सामाजिक और सांस्कृतिक समर्थन की भूमिका
  • समुदायों और समाजों के सांस्कृतिक आयाम
  • सामाजिक न्याय और उत्थान की योजनाएँ
  • सामाजिक असमानता और समस्याएं

3. राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता

  • नेतृत्व और राजनीतिक शिक्षा
  • नागरिक अधिकार, कर्तव्य और समर्पण
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और कार्यक्रम
  • जन सहयोग और नगरिक सहभागिता

4. ग्रामीण और शहरी विकास

  • ग्रामीण और शहरी प्रशासन के माध्यम
  • ग्रामीण और शहरी विकास की योजनाएँ
  • ग्राम स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा
  • शहरी मुद्दे और समस्याएं

5. सार्वजनिक नीति और प्रशासनिक नैतिकता

  • नैतिकता और सेवाभावना की महत्वपूर्णता
  • सार्वजनिक सेवाओं की व्यवस्था और उनका प्रबंधन
  • संविदानिक प्रमुखताएँ और नीतियाँ
  • आपत्तिग्रस्त व्यक्तियों और समुदायों का सहारा

6. आपत्तिप्रबंधन और सुरक्षा

  • प्राकृतिक आपदाएँ और उनका प्रबंधन
  • आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, और राष्ट्रीय सुरक्षा
  • संघर्ष एवं शांति स्थापना के माध्यम

7. आंतरराष्ट्रीय संबंध और विश्व मामले

  • भारत के विश्व मामलों में भूमिका
  • भारत की आंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग
  • आंतरराष्ट्रीय संगठन और विश्व स्तर के मुद्दे

8. नैतिकता और उद्यमिता

  • नैतिकता, न्याय, और संविधानिक मूल्यों का पालन
  • उद्यमिता और व्यापारिक नैतिकता के प्रियेरायण

GS PAPER III

1. अर्थव्यवस्था की समझ

  • बजट और इसके प्रकार
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की विशिष्टताएँ
  • आर्थिक विकास के प्रमुख आँकड़े और दिशानिर्देश
  • वित्तीय संकट और उसके प्रभाव
  • आर्थिक सुरक्षा और उसके माध्यम
  • नौकरियों के सृजनात्मकता और संवर्द्धन
  • स्मार्ट सिटीज़ और डिजिटल भारत के अर्थनीति में योगदान
  • आर्थिक समस्याएँ और उनके समाधान के माध्यम
  • सामाजिक और आर्थिक असमानता की चुनौतियाँ
  • आर्थिक योजनाएँ और उनके प्रभाव

2. प्रौद्योगिकी, विज्ञान, और इनोवेशन

  • भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उदाहरण
  • नैनोटेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, और स्थूल विज्ञान के उदाहरण
  • भारतीय वैज्ञानिकों और उनके योगदान
  • आधुनिक प्रौद्योगिकियों के आने से उत्पन्न सुविधाएँ
  • आईओटी, बिग डेटा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग
  • डिजिटल भारत और सूचना प्रौद्योगिकी के योगदान
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लाभ और चुनौतियाँ
  • नवाचार और तकनीकी उन्नति के आवश्यकता
  • विज्ञानिक अनुसंधान की महत्वपूर्णता
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नैतिकता और उद्यमिता

3. उर्जा सुरक्षा, वायुमंडल, और पर्यावरण

  • ऊर्जा संसाधनों के प्रकार और उनका प्रबंधन
  • ऊर्जा सुरक्षा की महत्वपूर्णता और योजनाएँ
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और उनका प्रबंधन
  • पारिस्थितिकी और जलवायु संरक्षण के उपाय
  • अद्यतन ऊर्जा तंत्र की आवश्यकता और योजनाएँ
  • वायुमंडलीय प्रदूषण और उसके प्रभाव
  • जल संरक्षण और पुनर्जलवायुकरण के उपाय
  • वन्यजीव संरक्षण के योजनाएँ और महत्व
  • प्रदूषण और पर्यावरणीय उपाय

4. बाजार और वित्तीय सेवाएँ

  • निवेश के प्रकार और उनकी उपायोगिता
  • सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की योजनाएँ
  • फिनटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर फिनेंस के प्रमुखता
  • बैंकिंग संरचना की सुधार और बैंक मोडर्निज़ेशन
  • निवेश के लिए प्राथमिक सेक्टर और क्षेत्रीय योजनाएँ
  • वित्तीय सेवाओं की डिजिटलीकरण की योजनाएँ
  • बाजार वृद्धि के प्रमुख कारण और प्रभाव
  • संवितरण और अधिग्रहण के माध्यमों का सुधार
  • वित्तीय समस्याएँ और उनके समाधान

5. नौकरियों की रचना, विकास और न्याय

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की रोजगार समस्याएँ
  • स्वयंरोजगार और उद्यमिता के योजनाएँ
  • स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण विकास के संबंध
  • उद्यमिता प्रोत्साहन योजनाएँ और कार्यक्रम
  • नौकरियों की समानता और भर्ती की प्रक्रिया में न्याय
  • शैक्षिक प्रशिक्षण के योजनाएँ और उनका प्रभाव
  • कृषि और ग्रामीण विकास से उत्त्पन्न रोजगार
  • सामाजिक और आर्थिक असमानता में रोजगार की भूमिका
  • नौकरियों की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता

6. संचार और संवाद साधन

  • डिजिटल भारत और इलेक्ट्रॉनिक संवाद के प्रमुखता
  • सार्वजनिक संवाद और मीडिया के द्वारा समाचार का प्रसारण
  • सोशल मीडिया के वायरलता और उसके प्रभाव
  • समाचार और संचार मीडिया की आवश्यकता
  • ब्रोडकास्ट एवं डिजिटल मीडिया के नियम और विवाद
  • विचार-मीडिया का योगदान और महत्व
  • इंटरनेट की उपयोगिता और खतरे
  • समाचार विज्ञान और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म
  • सोशल मीडिया के रोल और नियम

7. सुरक्षा और न्याय

  • आतंकवाद, गिरफ्तारियों, और नक्सलवाद का प्रबंधन
  • आतंकवादी संगठनों की गतिविधियाँ और उनके खतरे
  • न्याय प्रणाली में सुधार और विचारों की स्वतंत्रता
  • बच्चों की सुरक्षा, महिला सुरक्षा, और उनके अधिकार
  • न्याय प्रणाली के द्वारा समस्याओं का समाधान
  • पुलिस, जजों, और सुरक्षा बलों की प्रमुखता
  • आपराधिक और जातिगत हिंसा के प्रबंधन
  • अधिकारिक प्रक्रिया और न्यायिक संस्थानों की आवश्यकता
  • सामाजिक न्याय और व्यावसायिक समस्याएं

8. आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा

  • आपदा प्रबंधन की योजनाएँ और तैयारी
  • आपदा प्रबंधन और जनसंचार की महत्व
  • प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित प्रमुखता
  • आपदा प्रबंधन में नागरिक सहयोग की आवश्यकता
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के प्रमुखता
  • आंतरिक और बाहरी सुरक्षा योजनाएँ
  • सैन्य और पुलिस की ताकत और तैयारी
  • साइबर सुरक्षा और डिजिटल आपदा प्रबंधन
  • बायोटेरोरिज्म और जीव-सुरक्षा के प्रमुखता
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और संरक्षण की नीतियाँ

GS PAPER IV

1. नैतिकता और इंजीनियरिंग

  • नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता
  • तकनीकी और विज्ञान में नैतिकता की महत्वपूर्णता
  • नैतिक संवादना और नैतिक निर्णयों का आदान-प्रदान
  • नैतिक मंच और सामाजिक ज़िम्मेदारी

2. सिविल सेवा में नैतिकता

  • सिविल सेवा की नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता
  • सामाजिक न्याय, समर्पण, और सेवा की भावना
  • नैतिक संवादना और सार्वजनिक प्राधिकृतता
  • सिविल सेवा के तंत्रों की नैतिकता

3. सामाजिक न्याय और नैतिकता

  • सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता
  • असमानता, जातिवाद, और नैतिक मुद्दे
  • जनहित में सेवा की मानवीय दृष्टि
  • समाज में नैतिक बदलाव की प्रमुखता

4. नैतिक नेतृत्व और गवर्नेंस

  • नैतिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व की महत्वपूर्णता
  • गवर्नेंस में नैतिकता का स्थान
  • सार्वजनिक नेतृत्व में नैतिकता की प्रमुखता
  • नैतिकता के साथ सहकारिता और नेतृत्व

5. सामाजिक अदालत और नैतिकता

  • सामाजिक न्याय प्रणाली की नैतिकता
  • न्यायिक प्रक्रिया में नैतिकता का स्थान
  • न्यायिक निर्णयों में नैतिक मूल्यों का पालन
  • नैतिकता के साथ न्यायिक प्रणाली के सुधार

6. शिक्षा और नैतिकता

  • शिक्षा के क्षेत्र में नैतिकता की महत्वपूर्णता
  • शिक्षकों की नैतिक संवादना और उनकी भूमिका
  • शिक्षा संस्थानों में नैतिक मूल्यों का पालन
  • शिक्षा में नैतिक बदलाव की प्रमुखता

7. पर्यावरण और नैतिकता

  • पर्यावरण संरक्षण की नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता
  • पर्यावरण संरक्षण के नैतिक संवादना
  • प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग और नैतिकता
  • पर्यावरण में नैतिक बदलाव की प्रमुखता

8. नैतिक विचारधारा और सामाजिक सुधार

  • नैतिकता की विचारधाराएँ और उनका प्रभाव
  • सामाजिक सुधार के लिए नैतिक मूल्यों की महत्वपूर्णता
  • सामाजिक बदलाव में नैतिकता का योगदान
  • सामाजिक सुधारों में नैतिकता की भूमिका

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UPSC OPTIONAL SUBJECT LIST

  • भाषाओं का साहित्य: (असमीया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संताली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू।)
  • कृषि
  • पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान
  • मानवशास्त्र
  • वनस्पति विज्ञान
  • रसायन विज्ञान
  • सिविल इंजीनियरिंग
  • वाणिज्य और लेखांकन
  • अर्थशास्त्र
  • विद्युत इंजीनियरिंग
  • भूगोल
  • भूविज्ञान
  • इतिहास
  • कानून
  • प्रबंधन
  • गणित
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग
  • मेडिकल साइंस
  • दर्शन
  • भौतिकी
  • राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध
  • मनोविज्ञान
  • सार्वजनिक प्रशासन
  • समाजशास्त्र
  • सांख्यिकी
  • जीवविज्ञान
  • अन्य

UPSC INTERVIEW

UPSC साक्षात्कार: योग्यता परीक्षा के आखिरी पड़ाव में

UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद, उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। यह साक्षात्कार उम्मीदवार के व्यक्तिगत और विचारशीलता क्षमता को मापने का एक महत्वपूर्ण चरण होता है।

1. साक्षात्कार का आयोजन:

  • साक्षात्कार UPSC के केंद्राधिकृत, नई दिल्ली में होता है।
  • साक्षात्कार सामान्यत: फरवरी-मार्च के महीनों में आयोजित किया जाता है।

2. साक्षात्कार की प्रक्रिया:

  • साक्षात्कार का समय संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • साक्षात्कार में उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी, शैली, और व्यक्तिगत विचारों पर आधारित सवाल पूछे जा सकते हैं।

3. साक्षात्कार की धारा:

  • साक्षात्कार दो धाराओं में होता है: सामान्य धारा (अधिकांशत: अफसरों के लिए होता है) और विशेष धारा (स्थानिक प्रशासनिक सेवा और वन सेवा के लिए होता है)।

4. साक्षात्कार का प्रारूप:

  • साक्षात्कार आमतौर पर व्यक्तिगत जीवन, शैली, व्यक्तिगत और सामाजिक विचारों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, विज्ञान, साहित्य, और सामाजिक मुद्दों पर प्रश्न पूछ सकते हैं।
  • उम्मीदवारों की सामाजिक समझ, नैतिकता, और योग्यता को मापा जाता है।

5. साक्षात्कार के मानदंड:

  • साक्षात्कार में उम्मीदवार के ज्ञान, व्यक्तिगतता, नैतिकता, सामाजिक जागरूकता, और सामाजिक विचारधारा की मान्यता की जाती है।
  • उम्मीदवार की सामाजिक और सामाजिक जागरूकता क्षमता की मूल्यांकन होती है।

6. साक्षात्कार की तैयारी:

  • साक्षात्कार के लिए सबसे महत्वपूर्ण तैयारी होती है अपने आत्म-संवाद का।
  • समाचार पत्रों, मुख्य चर्चा संदेशों, सामाजिक मुद्दों, और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकारी से अद्यतित रहना महत्वपूर्ण है।
  • अपने साक्षात्कार की प्रैक्टिस के लिए मित्रों या परिवार के साथ बातचीत करें।

7. साक्षात्कार के दौरान:

  • साक्षात्कार के समय शांतिपूर्वक और स्वाभाविक रहें।
  • सवालों का ध्यानपूर्वक और विचारशीलता से उत्तर दें।
  • अपनी भाषा, शैली, और व्यक्तिगतता को स्थानीय परियोजनाओं और मुद्दों के साथ मेल करने की कोशिश करें।

8. साक्षात्कार का परिणाम:

  • साक्षात्कार के परिणाम आयोग द्वारा घोषित किए जाते हैं और वे अंकों के रूप में दिए जाते हैं।
  • साक्षात्कार के परिणामों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।
  • निष्कर्ष:
  • UPSC साक्षात्कार उम्मीदवारों के व्यक्तिगत और विचारशीलता क्षमता का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। साक्षात्कार की तैयारी, ज्ञान, सामाजिक जागरूकता की बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए, ताकि आप इस चुनौतीपूर्ण चरण में सफलता प्राप्त कर सकें।

CONCLUSION

निष्कर्ष: UPSC सिलेबस – सफलता की कुंजी

इस लेख में, हमने देखा कि UPSC सिलेबस एक व्यापक और महत्वपूर्ण विषय है जो एक सफल IAS/IPS/IRS अधिकारी बनने के लिए आवश्यक है। सिलेबस के भागों का अध्ययन करके उम्मीदवार समग्र ज्ञान और विचारशीलता में वृद्धि कर सकते हैं। हमने इस लेख में यह भी देखा कि सिलेबस में दिए गए विषयों के आधार पर आपके हितों के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता होती है, जो आपकी रूचियों और स्थानीयताओं के साथ मिलकर मिलाने में मदद करती है।

यदि आप UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो सिलेबस को ध्यानपूर्वक समझना और प्रत्येक विषय की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। आपकी सफलता उस प्रयास की बेहतरीन मिसाल हो सकती है जिसमें आपने सिलेबस की अच्छी तरह से तैयारी की है और उसे व्यावसायिक तरीके से प्राप्त किया है।

आखिरकार, सिलेबस एक मार्गदर्शक होता है जो आपके आयोजन में सहायक होता है, लेकिन यह केवल शुरुआत होती है। आपकी मेहनत, दृढ़ संकल्प और नियमित अभ्यास से ही आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इस परिक्षा की यात्रा में, सिलेबस आपका साथी होने के साथ-साथ आपकी मार्गदर्शक भी है।

“याद रखें, सफलता वही प्राप्त करते हैं जो संघर्ष का सामना करते हैं और हार नहीं मानते।”

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